Tuesday, December 06, 2011

नवगीत पर लखनऊ में दो दिवसीय आयोजन : एक प्रस्तुति

नवगीत की चर्चा साहित्य जगत में प्रायः होती रहती है। नवगीतों पर केन्द्रित काव्यपाठ भी हिन्दी प्रेमी सुनकर आनन्दित होते हैं। नवगीत कैसा हो? नवगीत का शिल्प कैसा हो? कथ्य कैसा हो? नवगीत का बिम्ब और प्रतीक विधान, नवगीत में लोकजीवन की झलक आदि ज्वलन्त विषयों पर नवगीतकारों द्वारा चर्चा करने के उद्देश्य से अभिव्यक्ति जालघर की ओर से दो दिवसीय आयोजन दिनांक २६ एवं २७ नवंबर २०११ को गोमती नगर लखनऊ स्थित "अभिव्यक्ति विश्वम्" के सभाकक्ष में किया गया।
नवगीत को केन्द्र में रखकर परिसंवाद एवं विमर्श का सफल आयोजन हुआ। इस अवसर पर १८ चर्चित नवगीतकारों सहित नगर के जाने-माने साहित्यकार, अतिथि, वेब तथा मीडिया से जुड़े लोग, संगीतकार व कलाकार उपस्थित रहे।

पहले दिन की सुबह कार्यक्रम का शुभारंभ लखनऊ की बीएसएनल के जनरल मैनेजर श्री सुनील कुमार परिहार ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर महाप्राण निराला द्वारा रचित कालजयी सरस्वती वंदना " वीणा वादिनि वर दे......." की प्रस्तुति रश्मि चौधरी व पंकज चौधरी द्वारा की गई।। दो दिवसीय नवगीत के इस कार्यक्रम में प्रतिदिन तीन-तीन सत्र हुए। कार्यक्रम की आयोजक पूर्णिमा वर्मन द्वारा नवगीतों पर फोटो कोलाज की प्रदर्शनी इस कार्यक्रम में आकर्षण का केन्द्र रही। इस अवसर पर उन्हीं नवगीतकारों के नवगीतों को चुना गया था जो वहाँ उपस्थित नहीं थै, यह आयोजकों की दूरदर्शिता का परिचायक तो था ही साथ ही अप्रत्यक्ष रूप से उन नवगीतकारों को फोटो कोलाज के माध्यम से सम्मान दिया जाना भी था।

26 नवंबर का पहला सत्र "समय से संवाद" शीर्षक से था। इसमें विनय भदौरिया ने अपना पत्र 'नवगीतों में राजनीति और व्यवस्था,' शैलेन्द्र शर्मा ने 'नवगीतों में महानगर,' रमाकांत ने नवगीतों में जनवाद, तथा निर्मल शुक्ल ने 'क्या नवगीत आज के समय से संवाद करने में सक्षम है॔" पत्र पढ़े। इस अवसर पर कानपुर से आये वीरेंद्र आस्तिक और माहेश्वर तिवारी ने प्रस्तुत किए गए पत्रों पर विस्तार से टिप्पणी की। प्रत्येक पत्र वाचन के उपरान्त वक्ता से खुलकर टिप्पणी की गई जिससे नवगीतों के विषय में जानकारी का आदान प्रदान आपस में हुआ।

दूसरे सत्र का विषय था- 'नवगीत की पृष्ठभूमि कथ्य-तथ्य, आयाम और शक्ति।' इसमें अवनीश सिंह चौहान ने अपना पत्र 'नवगीत कथ्य और तथ्य,' वीरेन्द्र आस्तिक ने 'नवगीत कितना सशक्त कितना अशक्त,' योगेन्द्र वर्मा ने 'नवगीत और युवा पीढ़ी' और माहेश्वर तिवारी ने 'नवगीत की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि' पढ़ा। अंतिम वक्तव्य डॉ ओमप्रकाश सिंह का रहा।
हिन्दी गजल के सशक्त हस्ताक्षर एवं सुप्रसिद्ध साहित्यकार कमलेश भट्ट कमल ने कहा कि नवगीत समाज में परिव्याप्त आज की विसंगतियों को अभिव्यक्त करने में पूरी तरह से समर्थ है। एक बिन्दु पर हिन्दी गजल और नवगीत एक ही पथ के राही से प्रतीत होते हैं।
सायं चाय के बाद तीसरे सत्र में आनंद सम्राट के निर्देशन में शोमू, आनंद दीपक और रुचिका ने माहेश्वर तिवारी, कुमार रवीन्द्र और पूर्णिमा वर्मन के नवगीतों की संगीतमय प्रस्तुति की। इसके बाद पूर्णिमा वर्मन जी ने अपनी पावर पाइंट प्रस्तुति दी जिसका विषय था- हिंदी की इंटरनेट यात्रा अभिव्यक्ति और अनुभूति के साथ नवगीत की पाठशाला, नवगीत और पूर्वाभास तक।

दूसरे दिन का पहला सत्र 'नवगीत वास्तु शिल्प और प्रतिमान विषय पर आधारित था।' इसमें जय चक्रवर्ती ने 'नवगीत का शिल्प विधान,' शीलेन्द्र सिंह चौहान ने 'नवगीत के प्रमुख तत्व', आनंद कुमार गौरव ने 'गीत का प्रांजल रूप है नवगीत,' डॉ ओम प्रकाश सिंह ने 'समकालीन नवगीत के विविध आयाम 'तथा मधुकर अष्ठाना ने 'नवगीत और उसकी चुनौतियां' विषय पर अपना-अपना पत्र पढ़ा।

दूसरे सत्र का शीर्षक था- नवगीत और लोक जीवन'। इसमें डॉ. जगदीश व्योम ने "नवगीतों में लोक के छीजने की पीड़ा" को विभिन्न उदाहरण देकर अपना पत्र पढा। श्याम नारायण श्रीवास्तव ने 'नवगीतों में लोक की भाषा के प्रयोग' तथा सत्येन्द्र तिवारी ने 'नवगीत में भारतीय संस्कृति' विषय पर अपना पत्र पढ़ा। दोनो दिनों के इन चारों सत्रों में प्रश्नोत्तर तथा निष्कर्ष भी प्रस्तुत किये गए।

दूसरे दिन के अंतिम सत्र में नवगीत पाठ का कार्यक्रम अत्यन्त प्रभावशाली रहा। कविता पाठ करने वाले रचनाकारों में थे- संध्या सिंह, अनिल कुमार श्रीवास्तव, राजेश शुक्ल, अवनीश सिंह चौहान, योगेन्द्र वर्मा व्योम, आनंद कुमार गौरव, विनय भदौरिया, रमाकान्त, जय चक्रवर्ती, सत्येन्द्र रघुवंशी, विजय कर्ण, डॉ. अमिता दुबे, शैलेन्द्र शर्मा, सत्येन्द्र तिवारी, श्याम श्रीवास्तव, शीलेन्द्र कुमार सिंह चौहान, डॉ. जगदीश व्योम, पूर्णिमा वर्मन, डॉ. ओम प्रकाश सिंह, मधुकर अष्ठाना, निर्मल शुक्ल, वीरेन्द्र आस्तिक, ओमप्रकाश चतुर्वेदी पराग और माहेश्वर तिवारी। इस सत्र की अध्यक्षता माहेश्वर तिवारी ने की तथा मुख्य अतिथि थे ओमप्रकाश चतुर्वेदी पराग। इस कार्यक्रम का आयोजन अनुभूति एवं अभिव्यक्ति जालघर की संपादक पूर्णिमा वर्मन ने डॉ. जगदीश 'व्योम' और अवनीश सिंह चौहान के सहयोग से किया। श्री वर्मन जी ने सभी को स्मृतिचिह्न प्रदान करते हुए विदा किया।




जमीन पर बैठे बाएँ से प्रवीण सक्सेना, आनंद कुमार गौरव, पूर्णिमा वर्मन, डॉ. अमिता दुबे, संध्या सिंह और अवनीश कुमार चौहान। कुर्सी पर बाएँ से- वीरेन्द्र आस्तिक, कमलेश भट्ट कमल, मधुकर अष्ठाना, ओम प्रकाश चतुर्वेदी पराग, माहेश्वर तिवारी, ओम प्रकाश सिंह, निर्मल वर्मा, शीलेन्द्र कुमार सिंह चौहान, पीछे खड़े हुए बाएँ से- डॉ जगदीश व्योम, अनिल श्रीवास्तव, जय प्रकाश त्रिवेदी, श्याम श्रीवास्तव, विनय भदौरिया, सत्येन्द्र तिवारी, जय चक्रवर्ती, आदित्यकुमार वर्मन (पीछे), रमा कान्त, डॉ. विजयकर्ण (पीछे), शैलेन्द्र श्रीवास्तव, योगेन्द्र वर्मा व्योम, गीता सिंह, सुनील कुमार परिहार एवं सत्येन्द्र रघुवंशी।


1 comment:

प्रो० डा. जयजयराम आनंद said...

navgeet pr sabhidrashtikono se vichar vimarsh kko padhkr ashwast huaa.aayojako tathaa sahbhagiyo ko bahut bahut badhaayee.sahbhaagiyo aur aayojako mese kuchh geetkar hamare mitro aur parichito mese bhi the.unke naam padh kr khushi huee.
Dr jaijairamanand
saint john canada